
असम की सियासत इस वक्त शोर से नहीं, ‘साइलेंट मूव्स’ से गर्म है। पहले 88 नामों की लिस्ट… और अब अचानक सिर्फ 2 उम्मीदवार। ये संख्या छोटी जरूर है, लेकिन इसके पीछे छिपी रणनीति किसी पॉलिटिकल थ्रिलर से कम नहीं। सवाल उठता है—क्या BJP कोई बड़ा ‘सरप्राइज कार्ड’ खेल रही है या यह चुनावी शतरंज की सबसे चालाक चाल है?
BJP की दूसरी सूची: कम नाम, बड़ा संदेश
Bharatiya Janata Party ने असम चुनाव के लिए अपनी दूसरी सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में दलगांव सीट से कृष्णा साहा, सिसिबरगांव सीट से जीवन गगोई को टिकट दिया गया है।
पहली सूची में 88 उम्मीदवारों का ऐलान करने के बाद अब यह ‘मिनिमल लिस्ट’ साफ संकेत देती है पार्टी हर सीट को माइक्रो-मैनेज कर रही है।
‘कम नाम, ज्यादा खेल’—रणनीति क्या है?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि BJP इस बार ओवरकॉन्फिडेंस से बचते हुए ‘कैलकुलेटेड रिस्क’ ले रही है।
Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व में पार्टी पहले ही मजबूत स्थिति में है। अब हर सीट पर उम्मीदवार चुनने में सोशल समीकरण + लोकल फैक्टर को प्राथमिकता दी जा रही है।
चुनावी टाइमलाइन: तारीखें जो तय करेंगी सत्ता
Assam में 9 अप्रैल 2026 को वोटिंग होगी। 4 मई को नतीजे आएंगे। 126 सीटों वाली विधानसभा में पिछली बार NDA ने 75 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। अब सवाल ये है—क्या इस बार भी वही कहानी दोहराई जाएगी या नया ट्विस्ट आएगा?
मुकाबला हुआ और दिलचस्प
इस बार चुनाव सिर्फ BJP vs Congress नहीं है। Trinamool Congress भी मैदान में उतर चुकी है। नए समीकरण, नए चेहरे और नए समीकरण बन रहे हैं। मतलब साफ है असम का चुनाव अब ‘मल्टी-कॉर्नर फाइट’ बन चुका है।

सिनेमा जैसी राजनीति: हर सीट एक कहानी
असम का हर चुनावी क्षेत्र इस बार एक फिल्मी सीन जैसा लग रहा है कहीं सस्पेंस, कहीं ड्रामा, तो कहीं बगावत की चिंगारी। BJP का यह ‘2 नामों वाला दांव’ वैसा ही है जैसे किसी फिल्म में क्लाइमेक्स से पहले अचानक ट्विस्ट आ जाए— छोटा दिखता है, लेकिन कहानी बदल देता है।
पहले 88 नाम देकर BJP ने कहा—“हम तैयार हैं।” अब 2 नाम देकर शायद कह रही है—“बाकी हम सोच-समझकर करेंगे!”
राजनीति में कभी-कभी कम बोलना ही सबसे बड़ा बयान होता है।
“असम का चुनाव इस बार Netflix सीरीज बन चुका है,” राजनीतिक विश्लेषक सुरेंद्र दुबे मुस्कुराते हुए कहते हैं।
“पहले एपिसोड में 88 उम्मीदवार आए, दूसरे एपिसोड में सिर्फ 2—लेकिन असली ट्विस्ट अभी बाकी है। BJP स्क्रिप्ट लिख रही है, विपक्ष उसे पढ़ने की कोशिश कर रहा है, और जनता? वो आखिरी एपिसोड का इंतजार कर रही है जहां फैसला होगा कि हीरो कौन और विलेन कौन।”
असम चुनाव अब सिर्फ नंबर गेम नहीं रहा यह माइंड गेम, टाइमिंग और रणनीति का खेल बन चुका है। और याद रखिए कभी-कभी चुनाव वही जीतता है, जो सबसे कम दिखता है… लेकिन सबसे ज्यादा सोचता है।
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